शुभ विवाह मुहूर्त २०२६: पंचांग सम्मत पवित्र तिथियां
विवाह संस्कार हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। विवाह के समय वर और कन्या दोनों की कुण्डली में त्रिबल शुद्धि (सूर्य बल, चन्द्र बल, और गुरु बल) का होना अनिवार्य होता है।
वर्ष २०२६ के मुख्य विवाह लग्न मास:
- माघ-फाल्गुन (जनवरी - फरवरी २०२६): पौष समाप्त होने के बाद १५ जनवरी से २८ फरवरी तक अनेक शुभ लग्न उपलब्ध हैं।
- वैशाख-ज्येष्ठ (अप्रैल - जून २०२६): अक्षय तृतीया से लेकर देवशयनी एकादशी तक श्रेष्ठ विवाह मुहूर्त रहेंगे।
- मार्गशीर्ष (नवम्बर - दिसम्बर २०२६): देवउठनी एकादशी के पश्चात् विवाह कार्यों का पुनः प्रारम्भ।
विवाह मुहूर्त चयन के नियम:
विवाह हेतु रोहिणी, म्रगशिरा, मघा, हस्त, अनुराधा, मूल, स्वाति, तीनों उत्तरा (उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद) तथा रेवती नक्षत्र अत्यंत शुभ माने जाते हैं। भद्रा, ग्रहण, और खरमास में विवाह वर्जित रहता है।