⏳ शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) वर्ष 2026

शुभ विवाह मुहूर्त २०२६: सम्पूर्ण वर्ष की शुभ तिथियां, नक्षत्र एवं लग्न शुद्धि चक्र

वर्ष २०२६ के सभी पवित्र विवाह लग्न, त्रिबल शुद्धि (सूर्य, चन्द्र, गुरु) एवं वर्जित तिथियों का प्रामाणिक विवरण।

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आपकी कुण्डली अनुसार इस विषय पर पूछे जाने वाले मुख्य प्रश्न

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क्या २०२६ के इन शुभ विवाह मुहूर्तों में से मेरी और मेरे होने वाले जीवनसाथी की कुंडली के अनुसार कौन सी तिथि हमारे लिए सबसे अनुकूल (Compatible) रहेगी?
💡 विवाह मुहूर्त का चयन केवल पंचांग के अनुसार नहीं, बल्कि वर-वधू की जन्म कुंडली में 'त्रिबल शुद्धि' (सूर्य, चंद्र और गुरु का बल) और उनके व्यक्तिगत ग्रहों की महादशा-अंतर्दशा के मिलान पर निर्भर करता है। सही तिथि का चयन दांपत्य जीवन में सामंजस्य और दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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विवाह के बाद आर्थिक समृद्धि और करियर में स्थिरता के लिए क्या कोई विशेष अनुष्ठान या उपाय हैं जिन्हें विवाह के मुहूर्त के समय ही करना शुभ होता है?
💡 वैदिक ज्योतिष में विवाह को 'गृहस्थ आश्रम' का आधार माना गया है। विवाह के समय विशेष ग्रहों की स्थिति और 'लग्न शुद्धि' न केवल वैवाहिक सुख, बल्कि धन और करियर की वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। शुभ मुहूर्त में किए गए कुछ विशिष्ट अनुष्ठान सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
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यदि हमारी कुंडलियों में मांगलिक दोष या कोई अन्य ग्रह बाधा है, तो क्या २०२६ के इन मुहूर्तों में विवाह करना उचित है, या हमें कोई विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
💡 मांगलिक दोष, नाड़ी दोष या अन्य ज्योतिषीय बाधाएं होने पर विवाह की तिथि का चयन सामान्य से अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। इन दोषों के प्रभाव को कम करने के लिए लग्न और नक्षत्र शुद्धि के साथ-साथ विशेष शांति-पूजा या ग्रहों के उपाय करना अनिवार्य हो जाता है ताकि भविष्य में कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
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शुभ विवाह मुहूर्त २०२६: पंचांग सम्मत पवित्र तिथियां

विवाह संस्कार हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। विवाह के समय वर और कन्या दोनों की कुण्डली में त्रिबल शुद्धि (सूर्य बल, चन्द्र बल, और गुरु बल) का होना अनिवार्य होता है।

वर्ष २०२६ के मुख्य विवाह लग्न मास:

  • माघ-फाल्गुन (जनवरी - फरवरी २०२६): पौष समाप्त होने के बाद १५ जनवरी से २८ फरवरी तक अनेक शुभ लग्न उपलब्ध हैं।
  • वैशाख-ज्येष्ठ (अप्रैल - जून २०२६): अक्षय तृतीया से लेकर देवशयनी एकादशी तक श्रेष्ठ विवाह मुहूर्त रहेंगे।
  • मार्गशीर्ष (नवम्बर - दिसम्बर २०२६): देवउठनी एकादशी के पश्चात् विवाह कार्यों का पुनः प्रारम्भ।

विवाह मुहूर्त चयन के नियम:

विवाह हेतु रोहिणी, म्रगशिरा, मघा, हस्त, अनुराधा, मूल, स्वाति, तीनों उत्तरा (उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद) तथा रेवती नक्षत्र अत्यंत शुभ माने जाते हैं। भद्रा, ग्रहण, और खरमास में विवाह वर्जित रहता है।

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☀️ आज का वैदिक पंचांग
09 Sep 2026
तिथि (Tithi): Krishna Trayodashi (त्रयोदशी)
नक्षत्र (Nakshatra): आश्लेषा (Ashlesha)
शुभ मुहूर्त (Abhijit): 11:55 AM - 12:45 PM
राहुकाल (Rahu Kaal): 12:00 PM - 01:30 PM
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