श्री कृष्ण जन्माष्टमी २०२६: वैदिक मुहूर्त एवं पारण विधान
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के पावन संयोग में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
मुख्य मुहूर्त एवं समय (Shubh Muhurat Timings 2026):
- अष्टमी तिथि प्रारम्भ: ०४ सितम्बर २०२६, रात्रि ०९:२५ बजे से
- अष्टमी तिथि समाप्त: ०५ सितम्बर २०२६, रात्रि ११:४५ बजे तक
- निशिता काल पूजा मुहूर्त: मध्यरात्रि १२:०१ AM से १२:४८ AM (अवधि: ४७ मिनट)
- रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ: ०५ सितम्बर २०२६, प्रातः ०७:१२ बजे से
- पारण समय: ०६ सितम्बर २०२६, सूर्योदय के पश्चात् (प्रातः ०६:०५ AM)
ज्योतिषीय महत्व (Astrological Significance):
भगवान कृष्ण का जन्म वृषभ लग्न (Taurus Ascendant) एवं रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। जन्माष्टमी के दिन चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहते हैं। इस दिन विशेष रूप से जिन जातकों की कुण्डली में चन्द्र-राहु ग्रहण दोष, विष दोष या सन्तान भाव में बाधा हो, उन्हें बाल गोपाल की विधिपूर्वक आराधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
विशेष पूजा सामग्री एवं विधि:
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), तुलसी दल, मक्खन-मिश्री, पीले पुष्प, चन्दन, एवं बांसुरी। मध्यरात्रि निशिता मुहूर्त में भगवान का अभिषेक कर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मन्त्र का १०८ बार जप करें।