⏳ शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) वर्ष 2026

श्री कृष्ण जन्माष्टमी २०२६: निशिता काल पूजा शुभ मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र एवं पारण समय

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि अनुसार भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का शुद्ध वैदिक मुहूर्त एवं विशेष पूजा विधि।

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आपकी कुण्डली अनुसार इस विषय पर पूछे जाने वाले मुख्य प्रश्न

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क्या मेरी जन्म कुंडली (Birth Chart) के अनुसार, इस वर्ष २०२६ की जन्माष्टमी का निशिता काल पूजा मेरे लिए विशेष रूप से फलदायी है?
💡 आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव यह निर्धारित करता है कि यह शुभ मुहूर्त आपके व्यक्तिगत जीवन में कितनी सकारात्मक ऊर्जा ला सकता है। गोचर के ग्रहों और आपकी वर्तमान महादशा के आधार पर, यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह पूजा आपके लिए किस प्रकार के आध्यात्मिक लाभ ला सकती है।
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करियर और आर्थिक समृद्धि (Career & Wealth) के लिए जन्माष्टमी की रात मुझे कौन से विशेष उपाय करने चाहिए?
💡 जन्माष्टमी का निशिता काल स्वयं में सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इस समय की गई विशेष पूजा, जैसे कि श्री कृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाना या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना, करियर की बाधाओं को दूर कर धन प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त करने में सहायक हो सकता है।
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यदि मेरी कुंडली में कोई ग्रह दोष (Planetary Doshas) है, तो क्या इस जन्माष्टमी पर पूजा करने से मुझे विशेष लाभ या सुरक्षा मिल सकती है?
💡 जन्माष्टमी का पर्व नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट करने और ग्रहों के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सर्वोत्तम है। यदि आप राहु, केतु या शनि की कठिन दशा (Planetary Dasha) से गुजर रहे हैं, तो निशिता काल में की गई आराधना आपको मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी २०२६: वैदिक मुहूर्त एवं पारण विधान

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के पावन संयोग में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

मुख्य मुहूर्त एवं समय (Shubh Muhurat Timings 2026):

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ: ०४ सितम्बर २०२६, रात्रि ०९:२५ बजे से
  • अष्टमी तिथि समाप्त: ०५ सितम्बर २०२६, रात्रि ११:४५ बजे तक
  • निशिता काल पूजा मुहूर्त: मध्यरात्रि १२:०१ AM से १२:४८ AM (अवधि: ४७ मिनट)
  • रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ: ०५ सितम्बर २०२६, प्रातः ०७:१२ बजे से
  • पारण समय: ०६ सितम्बर २०२६, सूर्योदय के पश्चात् (प्रातः ०६:०५ AM)

ज्योतिषीय महत्व (Astrological Significance):

भगवान कृष्ण का जन्म वृषभ लग्न (Taurus Ascendant) एवं रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। जन्माष्टमी के दिन चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहते हैं। इस दिन विशेष रूप से जिन जातकों की कुण्डली में चन्द्र-राहु ग्रहण दोष, विष दोष या सन्तान भाव में बाधा हो, उन्हें बाल गोपाल की विधिपूर्वक आराधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

विशेष पूजा सामग्री एवं विधि:

पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), तुलसी दल, मक्खन-मिश्री, पीले पुष्प, चन्दन, एवं बांसुरी। मध्यरात्रि निशिता मुहूर्त में भगवान का अभिषेक कर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मन्त्र का १०८ बार जप करें।

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☀️ आज का वैदिक पंचांग
09 Sep 2026
तिथि (Tithi): Krishna Trayodashi (त्रयोदशी)
नक्षत्र (Nakshatra): आश्लेषा (Ashlesha)
शुभ मुहूर्त (Abhijit): 11:55 AM - 12:45 PM
राहुकाल (Rahu Kaal): 12:00 PM - 01:30 PM
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